बिसफी गाँव से राजदरबार तक
मिथिला के प्रसिद्ध बिसफी गाँव में जन्मे महाकवि विद्यापति का जीवन सांस्कृतिक और साहित्यिक चेतना का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने कर्नाट और ओइनवार राजवंश के राजदरबारों में अपनी विद्वत्ता से विशेष प्रतिष्ठा प्राप्त की।
महाराजा शिवसिंह और महारानी लछिमा देवी के संरक्षण में महाकवि ने भक्ति, शृंगार और नीतिशास्त्र पर कालजयी रचनाएँ रचीं, जो आज भी भारतीय साहित्य की अमूल्य निधि हैं।